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Monday, February 21, 2011

चढ़कर इश्क .........


चढ़कर इश्क की कई मंजिले
अब ये समझ आया
इश्क के दामन में फूल भी है
और कांटे भी
और मेरे हाथ काँटों भरा
फूल आया
-------------
फूल सा इश्क पाकर
फूला न समाया
पर बेवफाई का काँटा हर फूल ने
ज़रूर चुभाया
----------------
अब तो मेरी हालत देख
दोस्त ये कहे
इश्क का तो यही ताकाज़ा है
तेरा दिल हर फूल पे
क्यों आया

6 comments:

  1. बहुत सुन्दर भाव संयोजन्।

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  2. बहुत भावपूर्ण अभिव्यक्ति..

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  3. अनुभवी बातें ...अच्छी प्रस्तुति

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  4. इश्क और फूल ... फूल और कांटे ... इन सब का साथ हो हमेशा हमेशा से है और रहेगा ....
    बहुत अच्छा लिखा है ....

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  5. it touches my heart...seema kapri

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