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Thursday, May 31, 2012

जलधि विशाल...आज गंगा दशहरा के पर्व पर

जलधि विशाल तरंगित ऊर्मि
नीलांचल नाद झंकृत धरणी 
कल-कल झिन्झिन झंकृत सरिता 
पारावार विहारिणी गंगा 


तरल तरंगिनी त्रिभुवन तारिनी 
शंकर जटा  विराजे वाहिनी 
शुभ्रोज्ज्वल चल धवल प्रवाहिनी 
मुनिवर कन्या हे ! भीष्म जननी 




पतित उद्धारिणी जाह्नवी गंगे 
त्रिभुवन तारिणी तरल तरंगे 
महिमा तव गाये धरनीचर 
मोक्ष प्राप्त हो जाए स्नान कर 


हरिद्वार  काशी पुनीत कर 
बहे निरंतर कल-कल छल-छल 
सागर संगम पावन पयोधि 
गोमुख उत्स स्थान हे वारिधि 


सर्वदा कल्याणी द्रवमयी 
मोक्षदायिनी जीवनदात्री 
बारम्बार नमन हे जाह्नवी 
वरदहस्त रखना करुणामयी 

7 comments:

  1. सर्वदा कल्याणी द्रवमयी
    मोक्षदायिनी जीवनदात्री
    बारम्बार नमन हे जाह्नवी
    वरदहस्त रखना करुणामयी

    samayik prastuti ke liye abhaar ...

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  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  3. वाह !!माता गंगा के लिए प्रयुक्त एक एक शब्द अनमोल..
    बहुत सुंदर शब्द संयोजन...
    जय माँ गंगे !!!

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  4. First time i steeped in here....nice post

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  5. तरल तरंगिनी त्रिभुवन तारिनी
    शंकर जटा विराजे वाहिनी
    शुभ्रोज्ज्वल चल धवल प्रवाहिनी
    मुनिवर कन्या हे ! भीष्म जननी

    बहुत सुन्दर . ..गंगे माँ की अविरल बहती पावन धारा..कल कल छल छल का सटीक वर्णन
    जय गंगे माँ आइये इन्हें पवित्र बनाये रखें
    भ्रमर ५

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  6. पतित उद्धारिणी जाह्नवी गंगे
    त्रिभुवन तारिणी तरल तरंगे
    महिमा तव गाये धरनीचर
    मोक्ष प्राप्त हो जाए स्नान कर

    वाह गंगा का कितना तरल वर्णन ।

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