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Tuesday, October 25, 2011

मेरी गली से

मेरी गली से जब भी गुजरीं वो
खुशबू का सैलाब सा बह गया
रूह तक पहुंची वो खुशबू-ए-उल्फत
मुहब्बत का तकाजा बढ़ गया
दिल के दामन में आकर
धूम मचाकर रख दिया
सपनो में भी चैन न आया
वो आयी और मै दीवाना हो गया
इश्क जब सर पर चढ़ा
वो बेवफा चिड़िया सी फुर्र हुई
अब तो ये हाल है जानम
मालूम नहीं कब दिन हुआ कब रात हुई

5 comments:

  1. बहुत सुन्दर और भावपूर्ण...दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें!

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  2. शुभकामनाएं--

    रचो रँगोली लाभ-शुभ, जले दिवाली दीप |
    माँ लक्ष्मी का आगमन, घर-आँगन रख लीप ||
    घर-आँगन रख लीप, करो स्वागत तैयारी |
    लेखक-कवि मजदूर, कृषक, नौकर, व्यापारी
    नहीं खेलना ताश, नशे की छोडो टोली |
    दो बच्चों का साथ, रचो मिल सभी रँगोली ||

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  3. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच-680:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  4. बहुत अच्छी रचना,आपको दीपावली व नववर्ष की सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं।

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