Followers

"Google-transliterate"

Type in Hindi (Press Ctrl+g to toggle between English and Hindi)

Saturday, October 23, 2010

सुन्दर ये मुखड़ा.............



सुन्दर ये मुखड़ा
चाँद का टुकडा
नयन विशाल है
अधर कोमल
————–
कटिबंध अनुपम
वलय निरूपम
कही है हीरक
कही कंचन
————-
नुपुर से सज्जित-
पग है, राजित -
घुंगर की ध्वनि
मृदु मद्धिम
————-
स्वर्णिम ये काया
मन में समाया
नायिका सी
सुन्दर है चलन

6 comments:

  1. बहुत ही सुन्दर कविता| धन्यवाद|

    ReplyDelete
  2. सुन्दरता का सुंदर वर्णन शब्दों का चयन और भी सुंदर

    ReplyDelete
  3. खूबसूरती से पिरोए गए अहसास. आभार.
    सादर
    डोरोथी.

    ReplyDelete
  4. सुन्दर रचना!
    --
    मंगलवार के साप्ताहिक काव्य मंच पर इसकी चर्चा लगा दी है!
    http://charchamanch.blogspot.com/

    ReplyDelete
  5. सुन्दरता का सुंदर वर्णन शब्दों का चयन और भी सुंदर

    ReplyDelete

among us