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Friday, September 10, 2010

काली घटा

ये काली घटा ने देखो
  क्या रंग दिखाया
नाच उठा मन मेरा
  हृदय ने गीत गाया

Monsoon Paintings - Desert Palisades by Cheryl Fechtसूखी नदियाँ प्लावित हुई
  जीवन लहलहाया
दादुर,कोयल,तोता,मैना ने
  गीत गुनगुनाया

तप्त धरती शीतल हुई
  बूंदे टपटपाया
धरती ने आसमान को छोड़
  बादल को गले लगाया

रवि ज्योति मंद पड़ा
  मेघ गड़गड़ाया
नृत्य मयूर का देख
ये मन मुस्कराया





ishkiya...badi dhe...

7 comments:

  1. गणेशचतुर्थी और ईद की मंगलमय कामनाये !

    अच्छी पंक्तिया लिखी है आपने ...

    इस पर अपनी राय दे :-
    (काबा - मुस्लिम तीर्थ या एक रहस्य ...)
    http://oshotheone.blogspot.com/2010/09/blog-post_11.html

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  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति।

    हिन्दी, भाषा के रूप में एक सामाजिक संस्था है, संस्कृति के रूप में सामाजिक प्रतीक और साहित्य के रूप में एक जातीय परंपरा है।

    देसिल बयना – 3"जिसका काम उसी को साजे ! कोई और करे तो डंडा बाजे !!", राजभाषा हिन्दी पर करण समस्तीपुरी की प्रस्तुति, पधारें

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  3. सुन्दर प्रकृति चित्रण ...जो रंग लेखन का है ..पढ़ने में असुविधा हुई ...

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  4. अच्छी पंक्तिया
    बहुत पसन्द आया
    हमें भी पढवाने के लिये हार्दिक धन्यवाद
    बहुत देर से पहुँच पाया..................माफी चाहता हूँ..

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